हिंडन मंथन-2026: पश्चिमी UP में नदी पुनर्जीवन का बड़ा आंदोलन शुरू, 'मेरठ डैक्लेरेशन' होगा जारी

Amanat Ansari 28 Jun 2026 02:09: PM 1 Mins
हिंडन मंथन-2026: पश्चिमी UP में नदी पुनर्जीवन का बड़ा आंदोलन शुरू, 'मेरठ डैक्लेरेशन' होगा जारी

मेरठ: गंगा की प्रमुख सहायक नदी हिंडन को प्रदूषणमुक्त और जीवंत बनाने के लिए एक दिवसीय उच्चस्तरीय तकनीकी कार्यशाला 'हिंडन मंथन-2026' का आयोजन 25 जून को मेरठ के होटल दोआब विलास में किया गया. उत्तर प्रदेश राज्य स्वच्छ गंगा मिशन और भारतीय नदी परिषद् द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित इस कार्यशाला में नदी विशेषज्ञों, वैज्ञानिकों, जनप्रतिनिधियों और सरकारी अधिकारियों ने हिस्सा लिया.

कार्यशाला का उद्देश्य हिंडन नदी के बहाव क्षेत्र में जल संरक्षण, प्रदूषण नियंत्रण और नदी पुनर्जीवन की ठोस रणनीति तैयार करना था. सात जनपदों (हिंडन बेसिन) के प्रतिनिधियों ने इसमें सक्रिय भागीदारी की.

उद्घाटन सत्र में उत्तर प्रदेश के जल शक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह, जल शक्ति राज्य मंत्री दिनेश खटीक, बागपत सांसद राजकुमार सांगवान, मेरठ कैंट विधायक अमित अग्रवाल, उत्तराखंड CM के रणनीतिक सलाहकार मनु गौड़ और शोभित विश्वविद्यालय के कुलाधिपति कुंवर शेखर विजेंद्र ने शिरकत की.

कार्यशाला में चार अलग-अलग तकनीकी सत्र आयोजित किए गए, जिनमें देश के प्रमुख नदी विशेषज्ञों, डॉ. विनोद तारे (सी-गंगा संस्थापक), डॉ. अनिल, गौतम (पीपुल्स साइंस इंस्टीट्यूट), डॉ. डी.एस. बुंदेला (ICAR-CS SRI) और गौरा चंद्र दास (WWF) ने प्रस्तुतिकरण दिए.

पद्मश्री भारत भूषण त्यागी सहित कई अन्य विशेषज्ञों ने हिंडन नदी सुधार, जल संरक्षण और रिबाउंड तकनीक पर विस्तार से चर्चा की. इस दौरान कल्किधाम पीठाधीश्वर आचार्य प्रमोद कृष्णम, राज्य मंत्री सोमेंद्र तोमर, पूर्व केंद्रीय मंत्री संजीव बालियान, पूर्व राज्यसभा सदस्य विजयपाल तोमर, UP स्वच्छ गंगा मिशन के परियोजना निदेशक जोगेंद्र सिंह और टीहरी विधायक किशोर उपाध्याय सहित कई गणमान्य व्यक्ति मौजूद रहे.

विभिन्न सत्रों में सहारनपुर मंडलायुक्त डॉ. रूपेश कुमार, मेरठ मंडल वन संरक्षक आदर्श कुमार और मेरठ, बागपत, शामली, मुजफ्फरनगर के जिलाधिकारियों ने भी भाग लिया. कार्यशाला से निकले महत्वपूर्ण निष्कर्षों को 'मेरठ डैक्लेरेशन-2026' के रूप में जारी किया जाएगा.

इस घोषणा-पत्र को हिंडन नदी पुनर्जीवन के लिए समाज, प्रशासन और विशेषज्ञों के संयुक्त प्रयासों से लागू करने की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएंगे. यह कार्यशाला हिंडन नदी को उसके मूल स्वरूप में वापस लाने की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल साबित हो सकती है.

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