नई दिल्ली: विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और विभिन्न चिकित्सा अध्ययनों के अनुसार, दुनिया भर में हर छह में से एक पुरुष बांझपन (infertility) की समस्या से जूझ रहा है. यह धारणा गलत है कि गर्भधारण में दिक्कत केवल महिलाओं से जुड़ी होती है. शोध बताते हैं कि 40-50% मामलों में पुरुषों के कारण गर्भधारण नहीं हो पाता. इसके पीछे जीवनशैली, खानपान की आदतें, तनाव और समय पर जांच न करवाना जैसे कारण जिम्मेदार हैं. पुरुष बांझपन के प्रमुख कारण धूम्रपान और शराब का सेवन है. ये आदतें शुक्राणुओं की गुणवत्ता और संख्या को नुकसान पहुंचाती हैं.
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर एक साल तक गर्भधारण की कोशिश के बाद सफलता न मिले, तो पुरुष और महिला दोनों को फर्टिलिटी जांच करवानी चाहिए. इससे समस्या का जल्द पता चलता है और IVF या IUI जैसे उपचारों से समाधान की संभावना बढ़ती है. सामाजिक जागरूकता की जरूरतबांझपन से जूझ रहे दंपतियों को अक्सर सामाजिक दबाव और अकेलेपन का सामना करना पड़ता है. परिवार और दोस्तों का भावनात्मक समर्थन इस स्थिति में महत्वपूर्ण है.
विशेषज्ञ मानते हैं कि बांझपन को लेकर सामाजिक कलंक को तोड़ना जरूरी है. खुलकर चर्चा और समय पर चिकित्सकीय सलाह से इस समस्या का समाधान संभव है. विशेषज्ञ की सलाहदिल्ली के एम्स के एंड्रोलॉजिस्ट डॉ. प्रशांत सिंह कहते हैं, "आज हर छह में से एक पुरुष बांझपन का सामना कर रहा है. गलत जीवनशैली इसका प्रमुख कारण है. हालांकि, समय पर जांच, उचित उपचार और स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर अधिकांश मामलों में सुधार संभव है."
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