इकरा हसन और बर्क की हुई फजीहत, संसद में इनके सरपरस्तों ने पकड़ा माथा, ओवैसी चले राहुल की राह !

Rahul Jadaun 04 Apr 2025 04:40: PM 4 Mins
इकरा हसन और बर्क की हुई फजीहत, संसद में इनके सरपरस्तों ने पकड़ा माथा, ओवैसी चले राहुल की राह !

नई दिल्ली: समाजवादी पार्टी के दो मुस्लिम युवा सांसद, वक्फ़ बोर्ड पर बहस के दौरान खड़े होते हैं...बार-बार पन्ना पलटते हैं, दोनों के हाथ में जो पेपर हैं उसके आख़िरी पन्ने पर एक शायरी लिखी है? दोनों वक्फ़ बोर्ड पर बोलते वक्त लिखा हुआ भाषण पढ़ते हैं! इकरा हसन का ख़ानदान सियासी है, बर्क को दादा से सियासत विरासत मिली! लेकिन दोनों के भाषण के दौरान सपा की पोल खुल गई! बर्क के बगल में बैठे ये हैं अखिलेश यादव के भाई धर्मेंद्र यादव, ज़ोर-ज़ोर से टेबल पीट रहे हैं?

इकरा हसन के भाषण के दौरान बदायूं से सपा के टिकट से चुनाव जीते आदित्य प्रताप यादव भी दिखते हैं...ये भी अखिलेश यादव के भाई हैं और शिवपाल यादव के बेटे हैं...पूरा ख़ानदान और समाजवादी पार्टी इकरा और बर्क के भाषण के दौरान टेबल पीट रही थी? तो क्या अखिलेश यादव की सियासत की कोई हवा संसद में खुल गई! इस रिपोर्ट को देखने के बाद आप कहेंगे, कथनी और करनी में फर्क होता है!

बिना पढ़े क्यों नहीं बोल पाया कोई सांसद?

दोनों सांसद मुसलमानों की बात करते हैं, लेकिन वक्फ़ बोर्ड पर चार शब्द बिना पढ़े समाजवादी पार्टी का कोई भी सांसद क्यों नहीं बोल पाया? अखिलेश यादव आधा हिन्दू, आधा मुसलमान बनने की कोशिश करते हैं, 20 मिनट के भाषण में सिर्फ 9 मिनट तक ही वक्फ़ बोर्ड पर बोलते हैं! अब अंदर की बात सुनिए! इकरा हसन और बर्क यूपी से सपा के सांसद हैं...UP में योगी सीएम हैं...बर्क पर गिरफ्तारी की तलवार लटकी है! सपा के सांसद और खुद सपा प्रमुख अखिलेश यादव की कई तस्वीरें बहुत कुछ इशारा करती है? कुछ दिन पहले ही सपा के राष्ट्रीय महासचिव और अखिलेश यादव के चाचा प्रोफेसर रामगोपाल यादव संसद के बाहर शाह के हाथों में एक चिट्ठी पकड़ाते हैं, जिसे शाह धीरे से दबा लेते है, और रामगोपाल मुस्कुरा कर पीछे मुड़ते हैं, तभी मीडिया सवाल पूछती है, पर वो मुस्कुराते हुए निकल जाते है! तो क्या सपा बीजेपी का विरोध नहीं कर पा रही है? भाषण के आख़िरी में बर्क एक शायरी पढ़ते है, जो शायरी वो पढ़ते हैं वो पेपर में नहीं, बल्कि फोन में लिखी थी! जैसे ही उन्होंने मोबाइल निकाला, पास बैठे धर्मेंद्र यादव के चेहरे का रंग बदल जाता है, तो क्या बर्क और इकरा का भाषण अखिलेश यादव ने लिखवाया था? संसद में दिया गया भाषण पहले अखिलेश के सामने पढ़कर सुनाया था?  बर्क शायरी का सहारा लेकर कहते हैं हम वक्फ़ बोर्ड पर आए कानून पर बगावत का ऐलान करते हैं! सुनिए? तो सवाल उठता है कि अगर सपा बगावत करने के मूड में है तो फिर 37 सीटों वाली सपा जिसके यूपी विधानसभा में सवा सौ विधायक है? वो यूपी में प्रदर्शन क्यों नहीं कर पा रही है? अखिलेश यादव इसी बीच वक्फ़ बोर्ड के बीच योगी से जुड़ा सवाल पूछते हैं, जिसमें शाह से कहते हैं कि अरे योगी बाबा का क्या होगा? बताइए-बताइए? तो शाह कहते हैं आप चिंता मत कीजिए, योगी ही रिपीट करेंगे! वक्फ़ बोर्ड पर भाषण देने की ललक हर उस नेता में दिखाई दे रही थी. जो मुसलमानों का वोट चाहता हैं! चंद्रशेखर को देखिए, शायरी पढ़ते हुए इतने जोश में आ जाते हैं कि वो आपा खो देते हैं! शायरी सुनाते हैं?

राहुल की राह पर चले ओवैसी!

अब मुसलमानों का मसीहा समझने वाले ओवैसी की बारी थी. ओवैसी साहब सपा से चार कदम आगे निकलने के लिए ठीक राहुल गांधी की तरह ही बिल को संसद में फाड़ देते हैं, हालांकि ओवैसी ने जो पेपर फाड़ा वो सांकेतिक था. लेकिन मुसलमान वोटर्स को तय करना चाहिए, उनके नेताओं को उनकी कितनी चिंता है? जिस वक्त वक्फ़ बोर्ड पर चर्चा हो रही थी. उस वक्त ओवैसी माथा पोंछते दिखाई दिए! सपा नेताओं का चेहरा हंसता हुआ दिख रहा था! इकरा को भाषण देने से रोका जाता है तो वो कहती हैं मैं अकेली मुस्लिम महिला सांसद हूं. इस बिल में महिलाओं के लिए कुछ नहीं है...वो बीजेपी की तरफ इशारा करती है कि बीजेपी मे कोई मुस्लिम महिला सांसद क्यों नहीं है? सुनिए? कुछ देर बाद बर्क साहब का नंबर आता है, बर्क साहब कहते हैं 240 सीटों वाली बीजेपी में कोई मुस्लिम सांसद क्यों नहीं है? भाषण सुनकर ऐसा लगा दोनों नेताओं का भाषण किसी एक ने लिखा था? क्या वो भाषण खुद अखिलेश यादव के कार्यालय में लिखा गया था. जिसे पढ़ने के लिए इकरा और बर्क को दिया गया? बर्क पर आरोप है कि उन्होंने पत्थरबाज़ी के लिए आम मुसलमानों को भड़काया था. सच ये है कि चार लाइन का भाषण बिना देखे वो भी वक्फ़ बोर्ड पर देते वक्त जुबान कांप गई? तय कीजिए सच्चाई और सियासत में फर्क कितना है!

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