अनंतनाग: जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग की एक अदालत ने 70 साल की एक बुजुर्ग पर्यटक के साथ बलात्कार के आरोपी की जमानत याचिका खारिज कर दी. अदालत ने इस घटना को समाज में "नैतिक पतन" और "बीमार मानसिकता" का प्रतीक बताया. जज ने कहा कि कश्मीर की प्राकृतिक सुंदरता ही पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए काफी नहीं है, बल्कि समाज के नैतिक मूल्यों को भी बनाए रखना जरूरी है.
यह घटना 11 अप्रैल 2025 को पहलगाम के एक होटल में हुई. महाराष्ट्र की इस बुजुर्ग महिला पर्यटक के साथ आरोपी ने जबरदस्ती उसके होटल के कमरे में घुसकर बलात्कार किया. आरोपी ने महिला का मुंह कंबल से बंद किया और हमला करने के बाद मौके से फरार हो गया. इस हमले में महिला को गंभीर चोटें आईं.
अदालत ने कहा कि एक बुजुर्ग महिला, जो कश्मीर जैसे पवित्र स्थान की यात्रा पर आई थी, के साथ ऐसा भयानक व्यवहार हुआ कि वह इस जगह को चुनने का हमेशा पछतावा करेगी. अदालत ने इस घटना को न केवल अपराध, बल्कि समाज में नैतिकता के पतन का उदाहरण बताया.
आरोपी, जुबैर अहमद, की जमानत याचिका खारिज करते हुए अदालत ने कहा कि इस मामले में जमानत देना उचित नहीं है. अदालत ने कई कारण गिनाए: अपराध की गंभीरता, जांच का जारी होना, आरोपी के फरार होने का खतरा, सबूतों के साथ छेड़छाड़ की आशंका और समाज पर इसका व्यापक प्रभाव. अदालत ने शिकायतकर्ता के बयान, गवाहों की गवाही, मेडिकल और फॉरेंसिक रिपोर्ट जैसे प्रारंभिक सबूतों के आधार पर कहा कि जमानत देना कानूनी रूप से गलत होगा.
अदालत ने यह भी जोर दिया कि कश्मीर को "धरती का स्वर्ग" कहलाने के लिए केवल उसकी प्राकृतिक सुंदरता ही काफी नहीं है, बल्कि वहां के नैतिक और सांस्कृतिक मूल्यों की मजबूती भी जरूरी है. इस घटना ने कश्मीर की छवि पर गहरा प्रभाव डाला है, और अदालत ने इसे समाज के लिए एक चेतावनी के रूप में देखा.
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