नई दिल्ली: राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 में तीन-भाषा नीति को लेकर चल रही बहस के बीच, तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने एक बार फिर भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है. गुरुवार को, उन्होंने भाषा नीति पर केंद्र के रुख को निशाना बनाने के लिए एक प्रसिद्ध कोट्स का इस्तेमाल किया, जिसमें कहा गया है "जब आप विशेषाधिकार के आदी हो जाते हैं, तो समानता उत्पीड़न की तरह लगती है."
यह भी पढ़ें: इस देश की सेना ने अपने ही देश में गिरा दिए 8 बम, कई लोग...
सोशल मीडिया एक्स पर एक पोस्ट में स्टालिन ने कहा कि यह कोट्स उन्हें याद दिलाता है कि कैसे कुछ "अधिकार प्राप्त कट्टरपंथी" तमिलनाडु की भाषाई समानता की मांग को कट्टरवादी और राष्ट्रविरोधी बताते हैं. उन्होंने भाजपा नेताओं पर राष्ट्रीय हितों में योगदान के बावजूद डीएमके सरकार की देशभक्ति पर सवाल उठाने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि गोडसे की विचारधारा का महिमामंडन करने वाले लोग डीएमके और उसकी सरकार की देशभक्ति पर सवाल उठाने की हिम्मत रखते हैं, जिसने चीनी आक्रमण, बांग्लादेश मुक्ति संग्राम और कारगिल युद्ध के दौरान सबसे अधिक धनराशि का योगदान दिया, जबकि उनके वैचारिक पूर्वज वही हैं जिन्होंने 'बापू' गांधी की हत्या की थी.
यह भी पढ़ें: एक्ट्रेस रान्या राव के पास कितना काला धन? घर से भी करोड़ों का सोना व कैश बरामद
स्टालिन ने केंद्र पर अपना हमला जारी रखते हुए कहा कि भाषाई समानता की मांग को अंधभक्ति नहीं माना जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि अंधभक्ति 140 करोड़ नागरिकों पर शासन करने वाले तीन आपराधिक कानूनों को ऐसी भाषा में नाम देना है, जिसे तमिल लोग पढ़ भी नहीं सकते या बोल भी नहीं सकते. अंधभक्ति राष्ट्र के लिए सबसे अधिक योगदान देने वाले राज्य को दूसरे दर्जे का नागरिक मानना और एनईपी नामक जहर को निगलने से इनकार करने के लिए उसके उचित हिस्से से वंचित करना है.
यह भी पढ़ें: गोल्ड स्मगलिंग में गिरफ्तार रान्या राव की पहली तस्वीर आई सामने, इस हालत में दिखीं
उन्होंने चेतावनी दी कि लोगों पर कोई भी भाषा थोपने से दुश्मनी पैदा होती है और राष्ट्रीय एकता कमजोर होती है. स्टालिन ने कहा कि असली अंधराष्ट्रवादी और राष्ट्रविरोधी हिंदी के कट्टरपंथी हैं, जो मानते हैं कि उनका हक स्वाभाविक है, लेकिन हमारा विरोध देशद्रोह है. एक दिन पहले, स्टालिन ने भी केंद्र की आलोचना की थी, और उसे प्रतीकात्मक इशारों में उलझने के बजाय तमिल भाषा का समर्थन करने के लिए सार्थक कदम उठाने का आग्रह किया था.
यह भी पढ़ें: क्या उत्तर प्रदेश के सहारे हिन्दुस्तान को दहलाने की कोई बड़ी साजिश रची जा रही है?
उन्होंने भाजपा के इस दावे पर सवाल उठाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को तमिल से बहुत प्यार है, और तर्क दिया कि ऐसी भावनाएं कार्रवाई में नहीं दिखती हैं. उन्होंने पूछा कि अगर भाजपा का यह दावा सच है कि हमारे माननीय प्रधानमंत्री को तमिल से बहुत प्यार है, तो यह कभी कार्रवाई में क्यों नहीं दिखती?. उन्होंने सरकार से प्रतीकात्मक कृत्यों के बजाय ठोस उपायों पर विचार करने का आह्वान करते हुए कहा कि संसद में सेंगोल को स्थापित करने के बजाय, तमिलनाडु में केंद्र सरकार के कार्यालयों से हिंदी को हटा दें.
खोखली प्रशंसा करने के बजाय, तमिल को हिंदी के बराबर आधिकारिक भाषा बनाएं और संस्कृत जैसी मृत भाषा की तुलना में तमिल के लिए अधिक धन आवंटित करें. जवाब में, भाजपा तमिलनाडु प्रमुख के अन्नामलाई ने राज्य की सीमाओं से परे तमिल को बढ़ावा देने के डीएमके के प्रयासों पर सवाल उठाया. उन्होंने पूछा कि राज्य और केंद्र में सत्ता में रहते हुए तमिलनाडु की सीमाओं से परे हमारी तमिल भाषा के प्रचार-प्रसार में आपकी क्या उपलब्धियां रहीं?
अन्नमलाई ने पूछा कि क्या किसी ने डीएमके को ऐसा करने से रोका? उन्होंने यह भी बताया कि तमिल विकास केंद्र कार्यक्रम पिछली एआईएडीएमके सरकार द्वारा शुरू किया गया था और इसे विस्तारित करने में स्टालिन की भूमिका को चुनौती दी. अन्नामलाई ने यह भी पूछा कि पिछली एआईएडीएमके सरकार द्वारा शुरू किए गए तमिल विकास केंद्र कार्यक्रम को लागू करने के लिए आपने क्या प्रयास किए हैं?